वैसे तो बारह महीने
हम एक दूसरे को
मुर्ख बना रहे है...?
फिर भी आज
1 अप्रैल को
हम मुर्ख दिवस
मना रहे हैं...?
मुर्ख दिवस मनाने
का अपना एक
अंदाज़ है ..!
यंहा तो हर कोई
मुर्ख बनाने में
सरताज है...?
चपरासी बाबू को
बाबू साहिब को
साहिब बड़े साहिब को
बड़े साहिब बॉस को
नेता जनता को
और जनता
अपने आप को
मुर्ख बना रही है ...!
तभी तो जनता
की लगाम इन
नेताओं के हाथ में
आ रही है...?
हमको जाति-धर्म
के नाम पर बाँट कर
ये वोट मांगते हैं ...?
भावनाओं को
भड़काना
ये बखूबी जानते हैं...?
आइये अब हम
इनको भी
मुर्ख बनायें ...!
अनेकता में एकता
और भाईचारे का
रंग इनको दिखाएँ ...!
हमें बाँटने वालों को
हम ऐसा छकाये....!
दुबारा हमारे घर
'संतोष" वोट मांगने
कभी न आयें....?
हम एक दूसरे को
मुर्ख बना रहे है...?
फिर भी आज
1 अप्रैल को
हम मुर्ख दिवस
मना रहे हैं...?
मुर्ख दिवस मनाने
का अपना एक
अंदाज़ है ..!
यंहा तो हर कोई
मुर्ख बनाने में
सरताज है...?
चपरासी बाबू को
बाबू साहिब को
साहिब बड़े साहिब को
बड़े साहिब बॉस को
नेता जनता को
और जनता
अपने आप को
मुर्ख बना रही है ...!
तभी तो जनता
की लगाम इन
नेताओं के हाथ में
आ रही है...?
हमको जाति-धर्म
के नाम पर बाँट कर
ये वोट मांगते हैं ...?
भावनाओं को
भड़काना
ये बखूबी जानते हैं...?
आइये अब हम
इनको भी
मुर्ख बनायें ...!
अनेकता में एकता
और भाईचारे का
रंग इनको दिखाएँ ...!
हमें बाँटने वालों को
हम ऐसा छकाये....!
दुबारा हमारे घर
'संतोष" वोट मांगने
कभी न आयें....?
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