दिल और दिमाग की ज़ंग
दोनों आपस में
बुरी तरह
झगड़ रहे थे
किसी मुद्दे पर
तर्क-कुतर्क
कर रहे थे ...!
दिमाग दिल पर
हावी था ...!
क्यूँ की सवाल
जजबाती था ...!
दिल अपना
मिज़ाज़ बदलने
न राजी था ...!
दिमाग बोला
तुम अपना
रिवाज़ बदलो ...!
दिल ने कहा
तुम अपना
अंदाज़ बदलो...!
हर बक्त
नफा-नुकशान का
हिसाब लगाते हो...!
इंसानी रिश्तों को
सदा झुठलाते हो...?
दिमाग झट तनाव
में आया ...!
जोर से ऊँचे स्वर में
चिल्लाया ....!
हर बक्त भावनाओं,
संवेदनाओं से
घिरे रहते हो...!
धोखा खाते ही,
मुझे दोष देते हो...!
कुछ तो मेरा भी
इस्तेमाल करो....!
और मुझे भी
साथ लेकर चलो...!
दिल को दिमाग का
ये सुझाव रास आया ....!
फिर दोनों
मुस्कराये....!
ख़ुशी से
हाथ मिलाये ...!
अब हम आपसी
समझ-सामंजस्य
से काम लेंगे ...!
तभी "संतोष"
फैसलों को
अंज़ाम देंगें ....?
दोनों आपस में
बुरी तरह
झगड़ रहे थे
किसी मुद्दे पर
तर्क-कुतर्क
कर रहे थे ...!
दिमाग दिल पर
हावी था ...!
क्यूँ की सवाल
जजबाती था ...!
दिल अपना
मिज़ाज़ बदलने
न राजी था ...!
दिमाग बोला
तुम अपना
रिवाज़ बदलो ...!
दिल ने कहा
तुम अपना
अंदाज़ बदलो...!
हर बक्त
नफा-नुकशान का
हिसाब लगाते हो...!
इंसानी रिश्तों को
सदा झुठलाते हो...?
दिमाग झट तनाव
में आया ...!
जोर से ऊँचे स्वर में
चिल्लाया ....!
हर बक्त भावनाओं,
संवेदनाओं से
घिरे रहते हो...!
धोखा खाते ही,
मुझे दोष देते हो...!
कुछ तो मेरा भी
इस्तेमाल करो....!
और मुझे भी
साथ लेकर चलो...!
दिल को दिमाग का
ये सुझाव रास आया ....!
फिर दोनों
मुस्कराये....!
ख़ुशी से
हाथ मिलाये ...!
अब हम आपसी
समझ-सामंजस्य
से काम लेंगे ...!
तभी "संतोष"
फैसलों को
अंज़ाम देंगें ....?