Monday, January 27, 2014

ये पंचायतें भी,
गज़ब ढा रही हैं....!
प्यार की सजा
गेंग-रेप से
दिला रही हैं...?
क्या..?
पंचायती राज्य
का ये ही
पैगाम है...?
लोकतंत्र में,
इंसानियत का
कत्ले-आम है...?
अब इनके
फैसलों पर भी
इन्ही के हिमायती
चाहते लगाम हैं...!
पंचायतों के
बे-तरकीब
फैसले जबरन
सरअंजाम हैं....!
'संतोष'अब
सरकारी मूकता.भी...
सरेआम है....?

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