इंसानी
संवेदना
न जाने कंहा
खोती जा रही है ...?
पर जानवरों में
मानवीय
संवेदना
आ रही है...?
क्या हम
जानवरों से
पीछे होते
जा रहे हैं....!
इंसान की छवि
खोते जा रहे हैं....?
बात बात पर
सिर्फ मुह
चलाते हैं ...
हासिल कुछ
नहीं कर पाते हैं.... ?
जानवर हाथ -पैर
चला मेहनत की
खाते हैं...!
हम मुफ़्त खाने की
लत लगाते हैं ....?
आदमी
आदमियत से
पीछे भागते हैं...
"संतोष"तभी तो
जानवर भी
आदमियत से
डर जाते हैं...!
संवेदना
न जाने कंहा
खोती जा रही है ...?
पर जानवरों में
मानवीय
संवेदना
आ रही है...?
क्या हम
जानवरों से
पीछे होते
जा रहे हैं....!
इंसान की छवि
खोते जा रहे हैं....?
बात बात पर
सिर्फ मुह
चलाते हैं ...
हासिल कुछ
नहीं कर पाते हैं.... ?
जानवर हाथ -पैर
चला मेहनत की
खाते हैं...!
हम मुफ़्त खाने की
लत लगाते हैं ....?
आदमी
आदमियत से
पीछे भागते हैं...
"संतोष"तभी तो
जानवर भी
आदमियत से
डर जाते हैं...!
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