Saturday, May 10, 2014


चुनावी
घमासान में
नेताओं के
सींघ निकल
आये हैं...!
बे-बजह
मुद्दों को छोड़
हवा में लड़ने को
उतर आये हैं....?
एक दूसरे पर
भद्दी छींटा-कशी
अब आम हो गई है....!
बाज भी आओ
चुनावी शाम हो गई है....!
कल की सुबह
नया सबेरा लेकर
आएगी ....!
ये रोज रोज की
तू-तू में-में "संतोष"
यही धरी रह जाएगी...?

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