INDRADHANUSH
Friday, April 15, 2016
Friday, February 19, 2016
Wednesday, August 13, 2014
प्रतिकूलताएं
अनुकूलताओं
की जननी हैं ...!
बाकी सब अपनी
ही करनी है ...?
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जानवर हैरान हैं
बढ़ते देख अपना
नया कुनवा ....!
आदमी की
शक्ल में ये
नए जानवर
हैं मनवा....?
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गम हो या ख़ुशी
ये अश्क दोनों में
अपना एक सा
रूप दिखाते हैं....!
दोनों अवशरों में
नमकीन अश्रु लिए
चले आते हैं....!
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वो जन-धन तन
को ही अपनी
हैसियत में
मापते थे ....!
क़ाबलियत
और विनम्रता को
कम आंकते थे ...?
बक्त ने जब
पलटा खाया
एक मुश्किल
दौर आया...!
जन-धन -तन
कुछ काम
न आया ....!
तब उन्हें
क़ाबलियत का
ख्याल आया ...!
अब वो ज्ञान पर
जोर देते हैं ...!
योग्यता के आगे
हाथ जोड़ लेते हैं ....!
गुमान का गुब्बारा
हवा में उड़ गया है ....!
"संतोष" अब
वो इंसानियत से
जुड़ गया है....!
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लोभ के झोंके.!
मोह के झोंके ...!
यश के झोंके....!
धन के झोंके
तन के झोंके ....!
जन के झोंके
इन झोंकों में
मन को टोंके.
अहम को रोकें ....!
फादर्स डे पर पिता जी को सादर समर्पित
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मेरे घर की
नीव हैं पिता ...!
मेरे अंदर के
जीव है पिता ....!
मेरे ख्वाबों,
मेरे ख्यालों,
मेरे विचारों,
की तरकीब
हैं पिता ...!
मेरे आदर्शों
मेरे सपनो की
ताबीर हैं पिता...!
मेरे परिवार की
अमूल्य जागीर
हैं पिता ...!
मेरी तकदीर
मेरी तस्वीर
मेरी क़ाबलियत
मेरे हाथों की
लकीर हैं पिता ....!
मेरे दुखों की चिंता,
निराशा में आशा,
मेरी दिलाशा
मेरी खताओं
की माफ़ी
हर मर्ज़
की चावी.
हैं पिता....!
मेरा अस्तित्व
मेरा कृतित्व ..!
मेरी आन
मेरी पहचान
हैं पिता....!
परिवार के
बट बृक्ष ...
हमारी खुशियां
ही थीं जिनका
एक लक्ष्य ....!
हैं पिता....!
क्रूर काल ने
ज़ुदा कर दिया ....!
साया पिता का
हमसे बे बक्त
विदा कर दिया
उनका आशीर्वाद
हमारे साथ है...!
हमारी प्रगति में
उनका ही हाथ है ....!
ईश्वर से बस यही
है.प्रार्थना ...!
हो उनकी पूरी
हर साधना...!
श्री चरणो में
सदा उनका
वास हो....!
'संतोष" उनके
आदर्शों में हमेशा
आस्था और
विस्वास हो ....!
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नीव हैं पिता ...!
मेरे अंदर के
जीव है पिता ....!
मेरे ख्वाबों,
मेरे ख्यालों,
मेरे विचारों,
की तरकीब
हैं पिता ...!
मेरे आदर्शों
मेरे सपनो की
ताबीर हैं पिता...!
मेरे परिवार की
अमूल्य जागीर
हैं पिता ...!
मेरी तकदीर
मेरी तस्वीर
मेरी क़ाबलियत
मेरे हाथों की
लकीर हैं पिता ....!
मेरे दुखों की चिंता,
निराशा में आशा,
मेरी दिलाशा
मेरी खताओं
की माफ़ी
हर मर्ज़
की चावी.
हैं पिता....!
मेरा अस्तित्व
मेरा कृतित्व ..!
मेरी आन
मेरी पहचान
हैं पिता....!
परिवार के
बट बृक्ष ...
हमारी खुशियां
ही थीं जिनका
एक लक्ष्य ....!
हैं पिता....!
क्रूर काल ने
ज़ुदा कर दिया ....!
साया पिता का
हमसे बे बक्त
विदा कर दिया
उनका आशीर्वाद
हमारे साथ है...!
हमारी प्रगति में
उनका ही हाथ है ....!
ईश्वर से बस यही
है.प्रार्थना ...!
हो उनकी पूरी
हर साधना...!
श्री चरणो में
सदा उनका
वास हो....!
'संतोष" उनके
आदर्शों में हमेशा
आस्था और
विस्वास हो ....!
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