प्याज जब,
इतराके,इठलाके,
फलों से बोली..
मुझसे अब नहीं
करना हंसी ठिठोली...!
में अब आम नहीं,
ख़ास हो गई हूँ ...!
सब्जी क्या...!
अब में फलों की भी
बॉस हो गई हूँ ...!
ये सुन शेव ने ,
जरा ऐतराज किया ...!
कहा तुमने रुलाने,
के अलावा क्या किया...?
हम तो लोगो को,
सेहत और
ताकत देते हैं .
और उसकी सही,
कीमत लेते हैं...!
प्याज गुस्से से,
बोखलाई...!
हमारे दुर्दिनों में,
हमें किसने पूछा भाई...?
आज हम जिस
मुकाम पर हैं ...
अपने दम से ,
राजनीती के
काम पर हैं ...!
हमारे नाम से,
सरकारें बदल
जाती हैं...!
जनता भाव सुन
दहल जाती है ...!
अब हमारे सर पर,
ही ताज है...!
जन्हा देखो वंहा ,
चर्चा में "संतोष"सिर्फ,
प्याज ही प्याज है...?
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