Friday, October 11, 2013

माँ के चरणों में सादर समर्पित

दुनियां में इंसा की सच्ची पहचान है माँ ..!
मेरे लिए तो रामायण,गीता कुरान है माँ ...!
हमारे दिल की धडकनों की जान है माँ ..!
संकट के क्षणों में मेरी तो भगवान है माँ...!
प्रेमाचल है जिसका ममता से धनवान है मा...!
साक्षात् दया की मूरत ऐसी दयावान है माँ...!
खुद जागी कभी भूखी रही मेरे लिए बरदान है माँ ...!
मेरा कतरा कतरा लहू का, तुझ पर कुर्बान है माँ ...!
सबसे ऊँचा है ओहदा जिसका,ब्रम्ह की वो विधान है माँ...!
चरणों में जो भी आजाता , करती सदा कल्याण है माँ ...!
तू ही दुर्गा,तू ही सीता,तू ही काली शत शत तुझे प्रणाम है माँ...!
तेरा कर्ज न कभी अदा कर पायें,हम तो सदा तेरे गुलाम हैं माँ...!
हर भूल हमारी क्षमा कर देती, ऐसी क्षमादान है माँ...!
हर मुश्किल आसां कर देती, "संतोष' ऐसी एक विज्ञानं है माँ...!

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