गर ज़िंदा हैं तो ज़िंदा होने का कुछ तो सबूत दीजिये ....!
सरे राह तड़पती मानवता पर, कुछ तो हुज़ूर कीजिये ...!
मरती संवेदनाओं को, जरा कुछ तो जीवंत कीजिये...!
नव-बालाओं,अबलाओं को समाज में बलवंत कीजिये
गर भ्रस्टाचार रोक न सकें,पर भ्रस्टाचार न कीजिये...?
सदाचार न सही न करें, पर कदाचार तो न कीजिये.. !
वोट की खातिर नेताओ, प्रजातंत्र पर प्रहार न कीजिये...!
अमन-चैन की बस्ती में, जाति-धर्म का वार न कीजिये...?
इंसानियत की राह में, इंसानियत से इंकार न कीजिये...!
कायम रहे भाईचारा,बे-बजह आपसी तकरार न कीजिये...!
रखें अपनी ख्वाहिशेों पर काबू,इक्छायें बे-शुमार न कीजिये...!
धन-दौलत की अंधी दौड़ में, गैर-बाजिब ब्यापार न कीजिये....!
"संतोष" ज़माने में हर शक्श पर, यूँ ही ऐतवार न कीजिये...!
लगे हैं यंहा चेहरे पै चेहरे,हर किसी को गम-ख्वार न कीजिये...?
सरे राह तड़पती मानवता पर, कुछ तो हुज़ूर कीजिये ...!
मरती संवेदनाओं को, जरा कुछ तो जीवंत कीजिये...!
नव-बालाओं,अबलाओं को समाज में बलवंत कीजिये
गर भ्रस्टाचार रोक न सकें,पर भ्रस्टाचार न कीजिये...?
सदाचार न सही न करें, पर कदाचार तो न कीजिये.. !
वोट की खातिर नेताओ, प्रजातंत्र पर प्रहार न कीजिये...!
अमन-चैन की बस्ती में, जाति-धर्म का वार न कीजिये...?
इंसानियत की राह में, इंसानियत से इंकार न कीजिये...!
कायम रहे भाईचारा,बे-बजह आपसी तकरार न कीजिये...!
रखें अपनी ख्वाहिशेों पर काबू,इक्छायें बे-शुमार न कीजिये...!
धन-दौलत की अंधी दौड़ में, गैर-बाजिब ब्यापार न कीजिये....!
"संतोष" ज़माने में हर शक्श पर, यूँ ही ऐतवार न कीजिये...!
लगे हैं यंहा चेहरे पै चेहरे,हर किसी को गम-ख्वार न कीजिये...?
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