Wednesday, April 2, 2014

मेहनशकश
मेहनत कर
मर रहा है...!
पूंजीपति
बिना मेहनत
अपनी जेब
भर रहा है...!
मज़दूर अपने
हक़ के लिए
लड़ रहा है...!
मालिक
खुलेआम
शोषण
कर रहा है...!
ये हमारी
आज़ादी का
दर्पण है...!
जंहा श्रमिकों का
सिर्फ तर्पण है...?
बेकारी,भूख
और गरीबी...!
आज़ाद भारत
में अभी भी...?
भारत माँ भी
अब अपनी
सरकारों से
परेशान है...!
क्यूँ कि "संतोष"
सरकारें मौलिक
मुद्दों से बनी
अनजान हैं...?

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