Thursday, April 10, 2014

मुसीबतों में ही इंसान की पहचान होती है....!
ग़मों के साये में ही आस्था जवान होती है...!

बे-शक रहें अपने अपने यक़ीनो के साथ
इन यक़ीनों से ही खुदाई महान होती है....!

यूँ तो बुरे-बक्त में, मंजूर है हमें हर मशविरा,
जुवां चुप है मुसीबत आँखों से बयान होती है....!

वफ़ा के बंधनों के नाम, ज़माने में बहुत हैं मगर
रिश्ते-नाते,दोस्ती की,बक्त से पहचान होती है...!

दौरे मुसीबत में, हर दर पै सज़दे करते हैं लोग,
उसी के नूर से ही रूहानी चाहत जवान होती है....!

दिलों पर काबिज़ हो जाती हैं ये तंग तन्हाईयाँ,
जब भी मुश्किलों में उलझी, हमारी जान होती है....!

"संतोष"दर्द दिल का किस किस को सुनाएंगे हम
सब्र रखना मुनासिब है,हौसलों में ही जान होती है ....!

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