Wednesday, April 2, 2014

ज्यादा लालच इंसान को नेता बना देता है...!
बंगाल से दिल्ली में ला खड़ा कर देता है..
दूसरों के बल पर कभी राजनीती नहीं होती...!
अपनी क़ाबलियत औरों से छिपी नहीं होती...!
सोचा था साम्राज्य का विस्तार करेंगे ...?
अब अन्ना के भरोसे नैया पार करेंगे ...!
देल्ही की जनता को ममता से मोह नहीं है ...!
और ममता के मोह का कोई छोर नहीं है..!
राजनीती किस करवट बैठ जाये ...?
आज तक कोई न इसे समझ पाये ...?
"संतोष"वक़्त नूर को बेनूर बना देता है!
छोटे से जख्म को नासूर बना देता है!

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