Wednesday, April 2, 2014


अद्वतीय,अनमोल,अतुल्य,
अविस्मरणीय है माँ
साक्षात् ममता की मूरत,
रमणी से भी रमणीय है माँ
अविनाशी,घट-घट वासी,
सब की संकट हारणी है माँ
भक्तों की सदा करती रक्षा,
छत्र,त्रिशूल धारिणी है माँ ...!
चरणो में जो भी माँ के आता ,
उसके लिए तो दयनीय है माँ ...!
कामना हमारी करती पूरी
हमारे लिए कमनीय है माँ ....!
अन्तर्वासी,अंतर्यामी,अभय दायनी,
बिन मांगे बर देती, बरदायनी है माँ
अंधेरों में तू राह दिखाती,भ्रम हटाती
भक्तों की कल्याण कारिणी है माँ ...!
"संतोष" पड़ा माँ शरण में तेरी
अब अपने अंक उठा ले माँ ....!
ये दुनिया मुझको रास न आवे
अब अपने दरश दिखा दे माँ....!

No comments:

Post a Comment