Wednesday, April 9, 2014

मंदिर मस्ज़िद और गुरुद्वारों में...
चर्च तथा तीर्थों के गलियारों में ...!
बहुत खोजा पर सतोष न मिला....

रहीसों और नेताओं की बस्ती में,
पूंजी-पतियों की अनंत मस्ती में
बहुत खोजा पर संतोष न मिला......

यज्ञों की पावन अग्नि ज्वालाओं में
मन के फेर की मन मालाओं में ..
बहुत खोजा पर संतोष न मिला.....

गंगा-यमुना के हर पावन तट में....
काशी जैसे शमशानों के मरघट में ..
बहुत खोजा पर संतोष न मिला.......!

चारों धाम की मंगल तीर्थ यात्राओं में...
गीता,वेद-पुराण और धर्म-शाश्त्रो में
बहुत खोजा पर संतोष न मिला.......!

बाबा-बैरागियों की धर्म की खोली में
बे-बस, मजबूर की याचक झोली में ...!
बहुत खोजा पर संतोष न मिला .....

मात-पिता के पावन हरि से चरणो में
मन-मंदिर के अंदर बहते झरनों में
जब दिल से खोजा तब "संतोष" मिला...!

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