Wednesday, April 2, 2014


कलियुग में फर्क नहीं है, साधू और शैतान का
बाबाओं ने नाम डुबाया, रहीम और राम का ...?

इंसानियत ही पहला धर्मं है इंसान का...
फिर पन्ना खुलता है गीता या कुरान का...

पर आदमी है यंहा राम का या रहमान का
भला तो वो पंक्षी है, जो है सारे जहान का ...?

दौलत की अंधी गली ही सबको प्यारी लागे
नेकी उनको रास न आवे,काम करें हैवान का...?

दी कुदरत ने है जब, एक सी नेमत हमको
प्रेम के ढाई आखर से,जीते दिल जहान का ...?

दिखाएँ दरिया दिली,मिटा दें गर में को हम अपने
बंदा खुद बन जायेगा खुदा,नाम होगा भगवान का ...!

जंहा में ज़िंदगी ज़मी की है "संतोष"दो पल की
फिर अनजान अनंत सफ़र है चिर आसमान का...!

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