अरे भाई माओ...!
दिल से दिल
मिलाओ ...?
जरा कुछ तो
संवेदना दिखाओ...!
अपने मलाल को
खुल के तो
बताओ....!
बहुत हो चुकी हिंसा
अब तो अमन के
रास्ते आओ...!
बातचीत से हर
समस्या का हल है...!
ये न भूलो
देखा किसने कल है...?
खूबसूरत प्रकृति की
छटा में यूँ न नफरत
बरसाओ...?
नैसर्गिक प्रेम की
धरा पर"संतोष" कुछ
तो प्यार फैलाओ..!
दिल से दिल
मिलाओ ...?
जरा कुछ तो
संवेदना दिखाओ...!
अपने मलाल को
खुल के तो
बताओ....!
बहुत हो चुकी हिंसा
अब तो अमन के
रास्ते आओ...!
बातचीत से हर
समस्या का हल है...!
ये न भूलो
देखा किसने कल है...?
खूबसूरत प्रकृति की
छटा में यूँ न नफरत
बरसाओ...?
नैसर्गिक प्रेम की
धरा पर"संतोष" कुछ
तो प्यार फैलाओ..!
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