प्रतिकूलताएं
अनुकूलताओं
की जननी हैं ...!
बाकी सब अपनी
ही करनी है ...?
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जानवर हैरान हैं
बढ़ते देख अपना
नया कुनवा ....!
आदमी की
शक्ल में ये
नए जानवर
हैं मनवा....?
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गम हो या ख़ुशी
ये अश्क दोनों में
अपना एक सा
रूप दिखाते हैं....!
दोनों अवशरों में
नमकीन अश्रु लिए
चले आते हैं....!
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लोभ के झोंके.!
मोह के झोंके ...!
यश के झोंके....!
धन के झोंके
तन के झोंके ....!
जन के झोंके
इन झोंकों में
मन को टोंके.
अहम को रोकें ....!
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