Saturday, May 10, 2014


फेसबुक में चेहरे
मुखौटों की तरह
बदलते हैं....!
कुछ तो चेहरों
को देख
मचलते हैं....?
असली नकली
की पहचान यंहा
मुश्किल है ....!
यंहा सम्हालना
सिर्फ अपना
दिल है....!
जो नकली चेहरों
की गिरफ्त में
आ जाते हैं....!
फिर वो जीवन भर
पछिताते हैं...?
कुछ तो समय
बिताने आते है....!
कुछ मौज उड़ाने
आते हैं....!
कुछ तो इसके
शिकार हो जाते हैं....!
इसके चक्कर में
बेकार हो जाते हैं....!
फिर भी संवाद
सम्प्रेषण का
सुलभ साधन है....!
विचारों की
अभिब्यक्ति का
सुगम माध्यम है....!
यंहा सोच-समझ कर
दोस्ती करिये....!
अनजान चेहरों से
सम्हलिये.....!
नई जानकारी
नए नए रूप में
यंहा मिलती है....!
एक दूसरे के
माध्यम से तेजी से
फल-फूलती है....!
फेसबुक का सही
प्रयोग ज्ञान
वर्धक है.....!
"संतोष" अन्यथा
ये निर्थक है....?

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