बिना सोचे समझे
कुछ भी बोलते हैं....!
बोलने के पूर्व न
तोलते हैं.
बे-बजह अपना
मुह खोलते हैं....!
फिर अपनी
वाणी से मुह
मोड़ते हैं....?
ये आजकल
आम हो गया है...!
आदमी रंग
बदलने में
बदनाम हो गया है....!
रंग बदलने में
गिरगिट भी
अब लजाती है....!
आज के आदमी से
मात खाती है....?
अब तो योगी संत
सब झूठ के
सहारे खड़े हैं....?
"संतोष" तभी तो
वो हम आप से
बेहद बड़े हैं...?
कुछ भी बोलते हैं....!
बोलने के पूर्व न
तोलते हैं.
बे-बजह अपना
मुह खोलते हैं....!
फिर अपनी
वाणी से मुह
मोड़ते हैं....?
ये आजकल
आम हो गया है...!
आदमी रंग
बदलने में
बदनाम हो गया है....!
रंग बदलने में
गिरगिट भी
अब लजाती है....!
आज के आदमी से
मात खाती है....?
अब तो योगी संत
सब झूठ के
सहारे खड़े हैं....?
"संतोष" तभी तो
वो हम आप से
बेहद बड़े हैं...?
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