Monday, January 27, 2014

में जब भी लिखता हूँ दिले-गुबार लिखता हूँ...!
खिज़ां के मौसम में, फसले -बहार लिखता हूँ ...!
नफरतों की बस्ती में, प्यार ही प्यार लिखता हूँ...!
वो गम दें या ख़ुशी, में गमख्वार लिखता हूँ ...!
धनवानों के धन की, में बढ़ती रफ़्तार लिखता हूँ ...
मुफलिसी की नाव की,फिसलती पतवार लिखता हूँ ....!
मेहनत कश आवाम की, जय जय कार लिखता हूँ....!
जुमले जालिमों के जुल्म के , में सौ बार लिखता हुँ....!
भ्रस्ट ब्यवस्था उजागर करने , भ्रस्टाचार लिखता हूँ ...!
शोषण और अन्याय के खिलाफ, इंक़लाब लिखता हूँ...!
जन-जन की हर पीड़ा को, में बे-हिसाब लिखता हूँ...
भूख,गरीबी,बेकारी पर,सत्ता की हरयाली पर दो टूक लिखता हूँ....!
मेहगाई की मार से मरते,नंगे-भूखे इंसानों की भूख लिखता हूँ .....!
पाक की नापाकगी पर,आतंकी करतूतों पर बे-खौफ लिखता हूँ...!
बेतहासा बढ़ती नेताओं की धन-दौलत को, सरकारी मौज लिखता हूँ ...?
गम की स्याह रातों में, रौशनी की बयार लिखता हूँ...
आम आदमी के दर्द को "संतोष' हज़ार बार लिखता हूँ ....!

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