Thursday, January 23, 2014

सत्ता में गुंडे हों या
गुंडों की हो सत्ता ....!
कोई फर्क नहीं
अलबत्ता .....!
अब नाम की
जन-सत्ता...!
गुंडे तो गुंडे हैं.
पुलिस बसूले
अब हफ्ता....?
बच्चे-बूढ़े,
महिलाओं पर
खूब लगाएं
वो लत्ता....?
जनता के
पैसे हों,
या हो सरकारी
खर्चा ...!
मौज मनाये
अब सत्ता...?
कोई फर्क नहीं
अलबत्ता.....!
जनता जब
सोती है....!
अपना हक़
खोती है .....!
"संतोष" अब तो
जागो जन-बच्चा.....!
कोई फर्क नहीं
अलबत्ता...!
सत्ता में गुंडे हों
या गुंडों की
हो सत्ता ......?

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