मन के लड्डू
आत्म प्रशंसा
चट खा जाती है ....!
और झट
आत्म मुग्धता
बढ़ा जाती है ....!
आत्म मुग्धता
आँखों में अंधकार
ला जाती है ...!
तभी खुद की
तसवीर भी
साफ नज़र
नहीं आती है...?
आत्म प्रशंसा
चट खा जाती है ....!
और झट
आत्म मुग्धता
बढ़ा जाती है ....!
आत्म मुग्धता
आँखों में अंधकार
ला जाती है ...!
तभी खुद की
तसवीर भी
साफ नज़र
नहीं आती है...?
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