अँधेरे से जिनकी हो गई है यारी
उजाले उन्ही से जले जा रहे हैं ...?
नफरतों के साये में जो बस रहे हैं
तराने वफ़ा के अब वही गा रहे हैं...!
हज़ारों दाग लगे हैं दामन पर जिनके
वही अब नेकी बयां किये जा रहे हैं ...!
तमन्नाओं की कश्ती डूबी इस जंहा में,
अरमान फिर भी जंहा से रखे जा रहे हैं ...!
हर शक्श सहमा सा बुझता सा दिखता,
मॅहगाई के तलवे में, सारे दबे जा रहे है,,,!
ब्यवसाय बनी है अब यंहा राजनीति ...
आम-जन इन्ही से, अब ठगे जा रहे हैं ....!
कंही महलों की महकती, खुशबु है बिखरी
कंही गर्दिशे -गम में, वो बिखरे जा रहे हैं...
खुशियों के दामन से कुछ सिमटे हैं बैठे
"संतोष" हम गम से ही निखरे जा रहे हैं ....!
उजाले उन्ही से जले जा रहे हैं ...?
नफरतों के साये में जो बस रहे हैं
तराने वफ़ा के अब वही गा रहे हैं...!
हज़ारों दाग लगे हैं दामन पर जिनके
वही अब नेकी बयां किये जा रहे हैं ...!
तमन्नाओं की कश्ती डूबी इस जंहा में,
अरमान फिर भी जंहा से रखे जा रहे हैं ...!
हर शक्श सहमा सा बुझता सा दिखता,
मॅहगाई के तलवे में, सारे दबे जा रहे है,,,!
ब्यवसाय बनी है अब यंहा राजनीति ...
आम-जन इन्ही से, अब ठगे जा रहे हैं ....!
कंही महलों की महकती, खुशबु है बिखरी
कंही गर्दिशे -गम में, वो बिखरे जा रहे हैं...
खुशियों के दामन से कुछ सिमटे हैं बैठे
"संतोष" हम गम से ही निखरे जा रहे हैं ....!
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