मैंने कल
चाहतों की
सब किताबें
फाड़ दी;
सिर्फ एक
कागज़ पर
लफ्जे माँ
रहने दिया है
क्यूँ की
दुनिया में
'संतोष' माँ
ने ही चाहत
"लफ्ज"
दुनिया को
दिया है ....?
चाहतों की
सब किताबें
फाड़ दी;
सिर्फ एक
कागज़ पर
लफ्जे माँ
रहने दिया है
क्यूँ की
दुनिया में
'संतोष' माँ
ने ही चाहत
"लफ्ज"
दुनिया को
दिया है ....?
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