पहले आदमी
की सही
पहिचान
उसके
आचार-विचार
ब्यवहार
हुआ करते थे ...!
अब जन -धन
कदाचार
हुआ करते हैं...!
सदाचार के
ठेकेदार
अब ज़ैल में
घूमा करते हैं ...?
की सही
पहिचान
उसके
आचार-विचार
ब्यवहार
हुआ करते थे ...!
अब जन -धन
कदाचार
हुआ करते हैं...!
सदाचार के
ठेकेदार
अब ज़ैल में
घूमा करते हैं ...?
No comments:
Post a Comment