Tuesday, September 24, 2013

आदमी की हर ख्वाहिश कभी पूरी नहीं होती...!
जिंदगी और मौत में कभी दूरी नहीं होती...?
कौन कितना अपना है या बेगाना ..!
वक्त करता है बयां जब मुश्किलें होती ..?
सपने सजाओ मगर खुली आँखों से,
वर्ना टूटने में भी कभी देरी नहीं होती...?
घने बदलो से ढक जाता है आसमा ,
दामिनी के दमकने से बरसातें नहीं होती...!
चन्दन की महक से खिचे आते हैं नाग,
पर नागों में कभी चन्दन की महक नहीं होती...!
मुनासिब है इंसानों को इन्सान समझना,
मगर शैतान बनने में भी कभी देरी नहीं होती..!
"संतोष" किस पर कैसे यकीं करें हम ..?
ये रंग बदलती दुनिया कभी सुनहरी नहीं होती ...?

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