हर घर की शान होती है बेटियां...!
दो कुलों की पहचान होती हैं बेटियां...!
घर घर में माँ बाप की आँख का पानी होती हैं बेटियां
अपनी होते हुए भी न जाने क्यूँ बेगानी होती हैं बेटियां
आज मुश्कुल में है उनकी जान रोती हैं बेटियां...!
अपने ही घर में अपना मेहमान होती हैं बेटियां...!
हर घर की रौनक एवं राजदुलारी होती हैं बेटियां...
प्यार की सजीव मूरत, जान से प्यारी होती हैं बेटियां..
माँ बाप की ख़ुशी की खातिर, अपना गम छुपा लेती हैं बेटियां....?
औरों के लिए जीती और खुद को भी भुला देती हैं बेटियां
जीवन में हर रिश्तों को बखूबी निभा लेती हैं बेटियां ...!
बेटों से बढ़कर बेटों की जिम्मेदारी निभा लेती हैं बेटियां
हमारे लिए तो "संतोष" ईश्वर का बरदान हैं बेटियां...!
हमारे अस्तित्व की पहचान हमारी मुस्कान हैं बेटियां....?
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संतोष कुमार नेमा "संतोष"
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